शनिवार, 3 जुलाई 2010

आई फ़ोरगाट डे, भुलक्कड़राम दिवस

आई फ़ोरगाट डे (भुलक्कड़राम दिवस) 2 जुलाई को मनाया गया। मनाना भी चाहिए, जब मुर्ख दिवस, मु्र्खाधिराज दिवस मनाया जा सकता है तो भुलक्कड़राम दिवस क्यों नहीं?

और इस दिन अपनी वर्ष भर की भुलक्कड़ी को याद करना चाहिए, भुली बिसरी चीजें आपके याद आ जाएं इसी बहाने। लेकिन क्या सभी भुलक्कड़राम होते हैं? या सारी चीजें-बातें याद रह जाती हैं।

हमें तो याद सब रहता है लेकिन जरुरत पड़ने पर भूल जाते हैं। जब हमें लगता है कि फ़लां चीज-वस्तु - कोई कागज, काम का है तो उसे संभाल कर ऐसे ठिकाने रख देते हैं कि जरुरत पड़ते ही मिल जाए।

लेकिन जब उसकी जरुरत पड़ती है तब भुल चुके होते हैं और सारा घर पलट डालते हैं पर वह नही मिलता। ऐसा ही होता है।

कुछ चीजें मैं भी भुल जाता हूँ, एक बार वकील साहब(हमारे मित्र अनुज) मेरे साथ बाईक पर कहीं गए थे। वापसी मैंने सीधे बाईक चालु की और एक किलोमीटर तक आ गया। जब किसी को देखकर रुका तो पीछे देखा, वकील साहब गायब थे।

इसका मतलब यह था कि या तो वे कहीं गिर गए या बाईक पर बैठे ही नहीं। मैं उस जगह पर वापस पहुंचा तो वे वहां बैठे हुए थे। मैने पु्छा "तुम यहां कैसे छुट गए?" तो उन्होने कहा कि "जैसे ही मैं बाईक पर बैठने लगा वैसे ही आप चल पड़े,मैं चिल्लाता रह गया।" बताईए हम जीते जागते चिल्लाते आदमी को भूल आए।

मैं चाबियां भूल जाता हूँ अक्सर, इसलिए हमेशा बुलेट (रायल इन्फ़ील्ड) की चाबी में लम्बी चैन डाल कर रखता था कि कहीं दिख ही जाएगी। वह फ़िर भी खो जाती थी। जाते वक्त कुछ समय उसे ढुंढने में ही खराब हो जाता है। यह तो रोज का ढर्रा हो गया है।

एक बार मेरे बेटे को इन्ही बरसात के दिनों में बुखार हो गया। पैरासिटामॉल से बुखार नहीं उतरा तो डॉक्टर मित्र को फ़ोन लगाकर दवाई पु्छी। रात के लगभग 12 बज रहे थे। मुसलाधार बरसात हो रही थी, भीगते हुए गेट खोला कार निकाली और केमिस्ट को घर जाकर जगाया। फ़िर उससे दवाई लेकर, उसे घर छोड़ा। जल्दी-जल्दी दवाई लेकर घर पहुंचा। गाड़ी लॉक की, गेट बंद किया, घर के अंदर घुसते ही श्रीमति जी ने दवाई मांगी, देखा तो दवाई कार के डेशबोर्ड पर रख कर बाहर भुल आया हूँ।

दवाइ निकालने गया तो कार की चाबी गायब । चाबी मुझे इग्निशन में लगी हुयी दिख रही थी। कार चारों तरफ़ से लॉक, अब हो गये फ़जीते। कैसे दवाई निकाली जाए। इधर बच्चा बुखार में तप रहा है। फ़िर कुछ जुगाड़ याद आ गए जिससे लॉक खुल गया। तब दवाई निकाल कर बच्चे को दी। ऐसी भुलक्कड़ी मुसीबत में डाल देती है।

बाहर टूर पर रहते हैं तो होटलों में सेविंग किट, ब्रशपेस्ट और अंडर वियर बनियान भूल जाते हैं। पिछले साल ठंड के सीजन में भुला हुआ मेरा एक शाल गुड़गांव के होटल में अभी तक पड़ा है।

एक बार जब एयरपोर्ट पहु्चे तो टिकिट ही घर भुल आए थे। गनीमत है कि रायपुर का एयरपोर्ट हमारे घर से ज्यादा दूर नहीं है फ़ोन करके मंगवा ली गयी।

मोबाईल तो कई भुल कर गु्मा चुके हैं।  इस तरह हम भी पूरी तरह भुलक्कड़ राम हो गए हैं। क्या आप भी ऐसे ही कुछ भूल जाते हैं? अगर भूल जाते हैं तो बन गए भुलक्कड़राम............!

36 टिप्‍पणियां:

  1. :)
    अच्छा हुआ भुलक्कड दिवस को नहीं भूले ,.... अब भूलना तो ईश्वर ने शायद इसी लिए बनाया होगा कि अगर बहुत सी चीज़ें न् भूली जाएँ तो जिंदगी नर्क बन जाय... अपनी ही कुछ हरकतें ऐसी होती हैं कि कभी याद आ जाए तो अपने ऊपर शर्म आ जाती है ... इस लिए बहुत कुछ भूल जाना भी अच्छा है ... वैसे बुद्धिजीवी(बुद्धि खा कर जीने वाले) अक्सर भुलक्कड़ होते हैं क्योकि अपने ही विचारों मे खोए रहते हैं ...
    बचपन मे तो मै भी बहुत भूलता था ... कई बार तो दूकान पर पैसे दे कर वापस आ जाता ... बिना सामान लिए '
    पद्म सिंह http://padmsingh.wordpress.com

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  2. हम भी बहुत कुछ भूलते हैं मगर हमे लाभ ये है कि सम्भाल कर रखी चीज़ें ढूँढने मे समय अच्छा कट जाता है।ापना तो हर दिन भुलक्कड दिवस होता है। शुभकामनायें

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  3. भुलक्कड दिवस तो ठीक है। जरा ये और बताइये कि घुमक्कड दिवस भी मनाया जाता है कि नहीं।

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  4. हा हा हा ! हमें तो होटलों में आज तक एक भी सामान नहीं मिला । वर्ना इसी बहाने कुछ कमाई हो जाती ।
    वैसे भुलक्कड़ दिवस तो पहली बार सुना है ।

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  5. सही हे मितान कभु-कभु कु़छु भुलाए के आंनद ही कुछ और हे,यदि दिमाग ह सब कुछ याद रखतिस त एक न एक दिन दिमाग ह जरुर फट जातिस,ऐ तव भगवान के हममन उपर उपकार हे के झट ले भुला जाथन .....

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  6. आपकी पोस्ट से ही पता चला की भुलक्कड दिवस भी मनाया जाता है....अब यह भूलने की बीमारी तो थोड़ी बहुत सबको ही होती है...
    पर आपकी प्रस्तुति बहुत मज़ेदार लगी

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  7. रोचक पोस्ट!

    हम तो एक बार कहीं पर अपना चश्मा भूल आये और आज तक बगैर चश्मे के ही काम चला रहे हैं क्योंकि चश्मा बनवाना ही भूल जाते हैं।

    वैसे कई बातों को भूल जाना मनुष्य के लिये आवश्यक भी है, न भूले तो जीना ही मुश्किल हो जाये।

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  8. चलो याद तो आया कि भुल्लकड़ों के लिए भी कोई दिन है । ऐसे समय पर आप याद आया करेंगे , बधाई बड़े भाई , बधाई ।

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  9. अरे वाह , में तो घर कि चाबी दरवाजे के बाहर लगा छोड़ देता हूँ ...खतरनाक सा भुलक्कड़ :)

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  10. वाह........वाह.......सुन्दर पोस्ट के लिए बधाई स्वीकारें।
    सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

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  11. एक दिन हम सुबह-सुबह अखबार पढ़ने के लिए हमें अपना चश्मा नहीं मिला, पूरा घर छान मरा पर चश्मा नहीं दिख रहा था, अंत में पत्नी ने बताया ...अजी चश्मा तो आपने पहले से ही पहन रखा है ..आप भी दिनों दिन भुलक्कड़ राम बनते जा रहे हो! सुन्दर रचना! जोरदार प्रस्तुति !

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  12. मैं भी दो बार चाबी कार के अन्दर भूल चुका हूं। और कार चोरों की तरह दरवाजा खोला।

    प्रणाम

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  13. हा हा हा हा हा………।पाय लागी महराज। झन पूछ भाई ये भुलाये कि किस्सा ला। गे रेहेंव बजार। गे रेहेंव नही गे रेहेन दूनो झन। स्कूटर रहिस ओ समय। सब्जी भाजी खरिदाइस। निकलेन इंदरा मार्केट ले, मै स्कूटर ला चालू करेंव अउ रेंगा देंव गाड़ी ला। थोर किन दुरिहा मा जाके पीछू मुड़ के पूछत हौं तरबूज लेना हे का कहिके। देखत हौं ओ तो बैठे च नई ये। बिचारी रेंगत रेंगत आवत रहै। अउ तोरे च कस किसा अभी घलो चलत हे। ओही बात:- डाक्टर साहेब मोला भुलाये के बिमारी होगे हे एखर दवाई दे देते। डाक्टर: ये बीमारी तोला कब ले हे? मरीज: कउन बीमारी डाक्टर साहेब? होगे न उलटा प्रश्न्। बने लागिस भुलक्कड़ दिवस के किस्सा हा। गाड़ा भर भर के बधाई।

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  14. मैं तो इतना ज्यादा भूलता हूं कि बस मैं न भूलूंगा..गाना गा-गाकर याद करता रहता हूं। और फिर जब यह गाना भी भूल जाता हूं तो भूल गया सब कुछ याद नहीं अब कुछ ... जूली... जूली चिल्लाते रहता हूं। वैसे यह जूली कौन है।
    देखा न फिर भूल गया।

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  15. हमारे पडोसी शर्मा जी पहले पुलिस मै थे रिटायर होने से पहले उन्हे भुलने की बिमारी लग गई, जब बिमारी ज्यादा बढ गई तो बच्चो ने उन के गले मै एक थेली बना कर ओर उस मै घर का पता ओर उन के बारे कि मुझे भुलने की बिमारी है लिख कर डाल दिया, एक दिन इन्ही सजन्न को लगा कि वो अपना घर भुल गये है, सामने खडी महिला से बोले बहन जी क्या आप मुझे पहचानती है, मै अपना घर भुल गया हुं, वो महिला लगी जोर जोर से रोने क्योकि वो उन की पत्नी थी, ओर वो घर के आंगन मै ही खडे थे, एक सज्जन को भुलने की बिमारी है या नही लेकिन वो हर रोज दुसरे की बीबी को पकड लेते है अपनी समझ कर:) राम बचाये इन भुलकडो से....

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  16. हमें तो आज पता चला भुलक्कड़ दिवस भी होता है !

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  17. @राज भाटिय़ा

    हा हा हा एक बार का आपका किस्सा पढ चुका हूँ
    जब आपने मित्र की बीबी को अपनी समझ लिया था।
    हा हा हा

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  18. 2 जुलाई को आई फ़ोरगाट डे था ?
    ओह ! मैं भूल गया.

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  19. अरे यार!!!
    किस बात पर टिप्पणी करनी थी ?

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  20. अब क्या बताएं भाई।
    पिछले दिनों मजबूरी में दिल्ली जाते समय घर की एक चाबी काम करने वाली भद्र महिला को दे दी थी जिससे आने पर घर चुस्त दुरुस्त दिखे। श्रीमती जी पहले ही पुत्र प्रेम में पड़ वहां जा चुकी थीं। सारा जरूरी सामान, चीजें वगैरह वगैरह आल्मारी में रख जाने से काफी पहले सहेज कर ताला लगा दिया था।

    दिल्ली पहुंच कर पता चला कि चाबी आल्मारी में ही टंगी शोभायमान होती रही थी।
    अब पता नहीं कि कौन चुस्त दुरुस्त रहा, घर या भद्र महिला।

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  21. अरे भाई हम भी कुछ भूल गए अरे कौन सा कमेंट्स लिखना था फिर भी एडीशन से बढ़कर भुलक्कड़ नहीं हो सकता ......हा हा

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  22. अरे वाह ऐसा भी दिवस होता है ? होना ही चाहिए ये बीमारी है भी लाइलाज :(

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  23. कहते हैं कि सिर में बादाम रोगन की मालिश करने से स्मरण शक्ति बढती है...आजमा कर देखिए. वैसे हम भी इस्तेमाल करते हैं :)

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  24. जी हां, बात करते हुए, क्‍या बात कर रहे हैं, यह भूल जाता हूं। सड़क पर कार चलाते हुए, किस सड़क पर हूं यह भूल जाता हूं। कहां जा रहा हूं यह भूल जाता हूं और चश्‍मा गले में टांग पर चश्‍मा तलाशता रहता हूं। कई बार नंबर मिलाकर यह भूल जाता हूं कि किसको मिलाया है और कई बार यही भूल जाता हूं कि क्‍या भूल गया।
    पर यह भूलना उस भूलने से अच्‍छा है जो यह याद रखते हैं कि होटल छोड़ते वक्‍त वहां से उनका तौलिया, साबुन इत्‍यादि उठाना याद रखते हैं। पर जो भुलाने से नहीं भुलाई जाती वो है हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग करना, टिप्‍पणी देना, पोस्‍ट पढ़ना और हिन्‍दी ब्‍लॉगरों से मिलना। अब बतलाये कोई इसे कैसे भुलायें ?

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  25. भाई साहब गजनी के अगले संस्करण मे आपका रोल पक्का
    वैसे यह भुलक्कड़ दिवस हर साल दो जुलाई को ही आता है क्या ?
    नही ऐसे ही पूछ लिया श्रीमती जी का जन्म दिन इसी तारीख को आता है ना इसलिये ।

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  26. @ शरद कोकास

    पूछने से लाभ क्‍या
    जब भूल ही जाना है
    कि क्‍या याद रखें
    पर आपकी विवशता है
    याद रखने की
    क्‍योंकि भूल नहीं सकते
    और भूलना भी नहीं चाहिए।

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  27. are...mai to tippani karna hi bhool gayaa tha. achanak yaad aayaa, to dubaraa aana pada.

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  28. कुछ चीजें तो मैं भी भूल जाता हूं, दर-असल यह मानवीय प्रकृति है.

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