शनिवार, 10 जुलाई 2010

सृजनगाथा सम्मान समारोह और अहफ़ाज के साथ घूमाई

सृजनगाथा सम्मान समारोह में हम 3बजने से 25 मिनट पहले ही प्रेस क्लब पहुंच गए थे। 27 किलो मीटर से आना था और बादल छाए हुए थे, बरसात हो जाएगी लग रहा था।

इसलिए समय से पहुंच जाए तो ठीक है,हम वैसे भी वचन के पक्के हैं,किसी को हां कह दिया तो मतलब हां ही है। चाहे परिस्थितियां हमारे अनुकूल हो या प्रतिकूल, इससे कोई फ़रक नहीं पड़ता।

जब प्रेस क्लब के हाल में पहुंचे तो कुर्सियां शोभायमान थी और कोई नहीं पहुंचा था। इसलिए हमने मानस जी को फ़ोन लगाया तो उन्होने कहा कि बस थोड़ी ही देर में हम पहुच रहे हैं। 3 बजे गिरीश पंकज भैया का फ़ोन आ चुका था कि वे पहुंच चुके हैं। कुल मिला कर कार्यक्रम अंग्रेजी समय से प्रारंभ हो गया। 

हम लोग कुछ देर लाबी में खड़े होकर चर्चियाते रहे। डॉ सुधीर शर्मा, राम पटवा जी, इत्यादि से पुर्व में भी मुलाकात हो चुकी थी,कुछ और जाने पहचाने चेहरे थे। इस कार्यक्रम में कुछ और लोगों से मुलाकात हुयी। अच्छा लगा,कार्यक्रम में सम्मिलित होना सार्थक हो गया।

अहफ़ाज़ रशीद,रमेश शर्मा,अजय त्रिपाठी,गीतकार लक्ष्मण मस्तुरिहा जी अजय सक्सेना (कार्टुनिस्ट)से भी चर्चा हुई। अनिल भैया की कमी अवश्य ही अखरी। वे होते तो मुलाकात हो जाती। अघोरपंथ ब्लाग वाले सुरेश पंडा जी से भी कुछ देर चर्चा हुई।

कार्यक्रम समाप्ति के पश्चात जाने लगे तो रमेश शर्मा जी चाहते थे कि उनके आफ़िस में कुछ देर बैठें। लेकिन हमें कहीं और जाना था इसलिए समय नहीं निकाल पाए। अहफ़ाज रशीद के साथ निकल पड़े। रास्ते में जब राजकुमार सोनी जी के घर के पास से गुजरे तो उनका फ़ोन आ गया,फ़िर तो ये हो नहीं सकता कि उनके घर के पास हों और उनसे बिना मिला चले जाएं।

जब उनके घर पहुंचे तो पता चला कि राजकुमार भाई समेत पूरा परिवार वायरल से प्रभावित है। बस कुछ देर बैठ कर हम अहफ़ाज के घर पहुंच गए।

वहां कम्प्युटर पर बैठे और समय चलता रहा। अह्फ़ाज भाई होटल से मनपसंद खाना ले आए, खाना खाकर ब्लाग की बातें होती रही। उनके ब्लाग की कु्छ समस्या दूर की।

अहफ़ाज भाई सोने चले गए और मैं कम्पयुटर पर काम करता रहा। रात के 1बज चुके सोचा कि अब चल कर सोया जाए। अहफ़ाज भाई ने बिस्तर लगा दिया और खुद खर्राटे भर रहे थे। मैं भी सोने का यत्न करने लगा।

तभी तहमद में कुछ सरसराहट होने लगी,उठकर देखा तो एक काकरोच हमले की तैयारी में था। मैने उसे झटकारा-फ़टकारा फ़िर सोने लगा। लेकिन वह काकरोच माना नहीं,अब दुसरी तरफ़ से आ गया। तब मुझे उसे उठकर ठिकाने लगाना ही पड़ा।

इस उहापोह में नींद कब आई पता नहीं लेकिन सुबह 5बजे नींद खुल चुकी थी। हमने देखा कि अहफ़ाज भाई कम्पयु्टर पर बैठे हैं चश्मा लगाए। वे एक फ़िल्म का प्रोमो लगाकर चा्य बनाने चले गए। 

दो घंटे नेट पर मगज मारी करने के बाद मैंने स्नान किया और अहफ़ाज भाई ने मेरे नास्ते के लिए पपीता काटा। जब तक मैं पपीता उदरस्थ करता तब तक उन्होने पोहा तैयार कर लिया था।

बहुत ही उम्दा पोहा बनाया था। मैने देखा कि वे खाना बनाने में आलस नहीं करते। उनके एक्वेरियम की मछलियां रात से ही परेशान हलाकान थी,एक अजनबी को देखकर उनकी निगाहें मेरी तरफ़ ही थी। मैं जिधर बैठता उधर ही आ जाती थी। इससे में मुझे पता चला कि इन्हे भी समझ होती है।

अहफ़ाज भाई ने बताया कि ये खाना मिलेगा सोचकर इधर आ रही हैं। मछलि्यां भी सोचती हैं लेकिन आदमी..........।

बस वहां से आने के बाद से ही बुखार और सर्दी खांसी ने जकड़ लिया। देशी विदेशी सभी दवाएं चल रही हैं और हम इधर ब्लाग लिख रहे हैं। परसों संगीता जी ने हल्का सा ड़ांटा भी था और आराम करने कहा था। लेकिन क्या करें चोर चोरी से जाए पर हेराफ़ेरी से न जाएं। हम चैट से अदृश्य होकर लिख रहें हैं।


सुनिए गंगा प्रसाद बरसैंया जी को

23 टिप्‍पणियां:

  1. वाह, अहफ़ाज भाई के हाथ से बने पोहे की खुशबू यहां तक आ रही है, हमें भी खाना पड़ेगा किसी दिन; :)

    भईया आज भी हम आडियो नहीं सुन पा रहे हैं, क्रोम और IE दोनो में देख डाले आडियो लिंक बार में हाथ का निशन बनता ही नहीं यानी क्लिकियाते नहीं बनता.

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  2. पोहा जरा कम खाते? हम जैसों की नजर लग गयी। लगता है अहफाज़ भाई के महमान बनना ही पडेगा शीघ्र स्वास्थय लाभ की कामना और धन्यवाद।

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  3. @ संजीव तिवारी

    भैया फ़ाईल थोड़ी बड़ी है और आपका नेट स्लो है,
    इसलिए लोड होने में कु्छ समय लगेगा ।
    मेरे यहां मस्त चल रहा है।

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  4. महाराज जी किचन में वायरल फीवर होने के बाद भी जम रहे हैं . ... एक काम करिए... बाजार में कालमेघ नाम का एक आर्युवेदिक पावडर आता है . एक कटोरी पानी में एक चम्मच कालमेघ पावडर डालिए ...और उसका काढ़ा बनिये .... सेवन करें ...गेरेंटी के साथ आपका वायरल फीवर दूर हो जावेगा.और आपको एक साल तक डेंगू , वायरल फीवर और मलेरिया नहीं होगा... ये रामवाण दवाई है ...

    स्वस्थ हों फिर किचिन में जाए..

    महेंद्र मिश्र

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  5. महाराज जी किचन में वायरल फीवर होने के बाद भी जम रहे हैं . ... एक काम करिए... बाजार में कालमेघ नाम का एक आर्युवेदिक पावडर आता है . एक कटोरी पानी में एक चम्मच कालमेघ पावडर डालिए ...और उसका काढ़ा बनिये .... सेवन करें ...गेरेंटी के साथ आपका वायरल फीवर दूर हो जावेगा.और आपको एक साल तक डेंगू , वायरल फीवर और मलेरिया नहीं होगा... ये रामवाण दवाई है ...

    स्वस्थ हों फिर किचिन में जाए..

    महेंद्र मिश्र

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  6. सॉरी किचन में अल्फाज जी जम रहे हैं ..

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  7. ईमानदारी से कहूँ तो मुझे मेहमान नवाज़ी का शौक बचपन से रहा है. मुंबई की एकाकी ज़िंदगी ने किचन का ऐसा चस्का लगाया की अब किसी के हाथ का भोजन सुहाता ही नहीं. विचारधारा मिल जाये तो जान हथेली पर रखता हूँ. वायरल आपको मेरे यहाँ नहीं राजकुमार के यहाँ मिला होगा. मैंने उसे एक्सेप्ट नहीं किया और आप उसे अपने साथ ले गए. लोचा पोहे या पानी में होता हो मैं भी पांच दिन भुगतता. बहरहाल आप ने मुझे नवाजिश बक्शी, इसके लिए शुक्रिया.

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  8. @ अहफ़ाज रशीद
    भाई लोचा पानी और पोहे का नहीं हैं।
    यह लोचा तो मौसम का है,
    अभी सभी घरों में पहुंच गया है।
    वायरल का कोई भरोसा नहीं कब कहां पहुंच जाए।

    आपके साथ कुछ समय बिताने से मैं बहुत कुछ सीखा।
    खातिरदारी में आपका कोई सानी नही है।

    आभार

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  9. महराज पाय लागी! अभी कइसन हस गा? बने लगिस के वोइसने हावे। ये वायरल हा 3-5 ताय तीन दिन पेरही नई त पांच दिन अउ कभू कभू हप्ता भर। कुछू होय ये ब्लॉग विटामिन हा मन ल सुकून पहुंचा देथे। अब भैई हम बंधे हन गा। नइ त हमू ला साहित्य के प्रति समर्पित बड़े बड़े परसिद्ध मनखे मन के आशार्वाद मिले के मौका मिले रहितिस। बने लिखे हस ओ लमहा के बरनन ला। जय जोहार…॥ अउ पारथौं मै गोहार…
    मोर चार आखर के चर्चा ब्लॉग 4 वार्ता मा करे के धन्यवाद बहुत बहुत! जय जोहार।

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  10. दादा
    जय जोहार !
    अब तबियत कैसी है ? एक बार H1N1 टेस्ट जरूर करवा लीजियेगा ...........सुना है दोबारा पैर जमा रहा है !
    बाकी पोस्ट बेहद मस्त लगी ! पर आराम करें पोस्ट तो फिर भी लग जाएगी !
    अपना ध्यान रखें !

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  11. हमे भी आप लालच दिला रहे है जी, पोहे का ओर लाजीज खाने का, चलिये अगली बार जरुर आप के संग जायेगे अहफ़ाज रशीद भाई के यहां

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  12. ओर जल्दी जलदी से ठीक हो जाये जी, शुभकामनाये

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  13. परसों संगीता जी ने हल्का सा ड़ांटा भी था और आराम करने कहा था। लेकिन क्या करें चोर चोरी से जाए पर हेराफ़ेरी से न जाएं....:)

    ढंग से डांट देतीं तो आज ये सब न् देखना पड़ता ...

    अब तो हमारी शुभकामनाओं से काम चलाइए :)

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  14. us din hamlog rah gaye. khair..fir kabhi. lekin ahafaz kee kalakari ke bare me pata chal gaya. bhojan banane me bhi mahir hai vah...sundar...

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  15. भैए, जरा सावधानी से। बरसातें हैं. कुछ भी एंड़-बैंड़ हो सकता है।
    गाय जैसी सीधी सब्जी लौकी भी सींग मारने लग गयी है। :-)

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  16. Moonchh wale Bau Jee,
    Namaste!
    Pahli baar padha aapko.....
    Maza aaya! Kasam tahamatiye Cockroach kee!
    Jai ho!

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  17. ललित जी आपका ब्लॉग पढ़ कर आश्चर्य लगता है कि आप ब्लॉग्गिंग, लोगो से मिलने जुलने का इतना समय कैसे निकल लेते हैं... साथ में स्वस्थ्य ठीक ना हो फिर भी ... आपके समर्पण भाव को दंडवत प्रणाम ! थोडा गुर व्यक्तिगत रूप से हमे भी दीजियेगा ! लगातार आपके ब्लॉग को पढ़ कर अब ऐसा लग रहा है कि पिछली दफे जब आप दिल्ली आये थे तो क्यों ना मिल पाया... अब लग रहा है कि कुछ मिस कर दिया ! कभी ना कभी आपसे मिलेंगे और गुर भी लेंगे ! सादर अरुण

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  18. सेती के चंदन रगडो मेरे लल्लन , जिनके यहाँ भी जाइये कम से कम खाना तो मत ही भूलिए , आने जाने के किराया भी वसूल होना चाहिये न

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  19. @ Mithilesh dubey

    अरे भाई बिलकुल सही कहा।
    हम तो किराया बचाते नहीं है नगद लेते हैं।
    सेंती का चंदन कौन छोड़ता है जो हम छोड़े।

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